Saturday, August 31, 2013

नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्शी तक पहुँचने में अभी बहुत सी रुकावटें रास्ते में खडी है और उसे दूर किये बिना पहुँचाना मुश्किल है 
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केवल फेसबुक और ट्वीटर जैसे सोशल साइटों पर मोदी जी के पक्ष में अपने विचार व्यक्त करना अलग बात है और जनसमुदाय के वोट को मोदी जी के पक्ष में लाना दूसरी बात, ये दोनों एक दुसरे से बिलकुल भिन्न है ------
आज देश की युवापीढ़ी परिवर्तन चाहती है क्यों की उसके पास सवाल बहुत ज्यादा है , लेकिन यह युवापीढ़ी कौन है – यह वह युवापीढ़ी है जो देश के शहरों और महानगरों में निवास करती है, जो टेलीविजन, इन्टरनेट, कम्प्यूटर, टेबलेट और स्मार्ट फोन जैसे संसाधनों से लैस है और फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल साइटों से जुडी हुई है... वह परिवर्तन चाहती है | दुसरे देशों का अनुसरण कर अपने देश में परिवर्तन चाहती है, वह हालात से समझौता करना नहीं जानती लेकिन ठीक इसके विपरीत भारत के गांवों में जो जनता और युवापीढ़ी है वह आज भी सदियों पीछे है , ना तो उसके पास टेलीविजन है ना ही इन्टरनेट, कम्प्यूटर, टेबलेट और स्मार्ट फोन जैसे संसाधन, क्यों की वह गरीब है और सीमित साधनों में जीवन यापन करते है | वह फेसबुक और ट्विटर जैसे सोशल साइटों के बारे में जानते तक नहीं है | वह आज भी उसी जिन्दगी को जी रहे है जो उसके पूर्वजों ने विरासत में दिए थे और इसी को अपनी नियति मान लिए है |
वो अपने वोट के महत्त्व को भी नहीं समझते है बस इतना जानते है की उनको वोट देना है, पर किसे देना है नहीं जानते, क्यों की उनको अपने अधिकार की जानकारी तक नहीं है और इसी का फायदा हमारे देश के राजनेता और उसके पालतू गुर्गे उठाते है ... और हम और आप चाहकर भी सत्ता परिवर्तन नहीं कर पाते है |
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अगर आप सचमुच सत्ता परिवर्तन करना चाहते है तो गाँव के तरफ जाइये ... गाँव के नौजवान और बूढ़े बुजुर्ग को उनके अधिकार को बताईये, उनके इस दशा का जिम्मेदार कौन है यह बताईये | उनके वोट में कितनी ताक़त है यह बताईये | उनका एक वोट इस देश के लिए क्या मायने रखता है यह बताईये ... केवल फेसबुक और ट्विटर पर लिख देने से देश की सत्ता नहीं बदल जायेगी ... उसके लिए तन, मन और धन लगाना पड़ेगा तब परिवर्तन आएगा |

Wednesday, August 14, 2013

जालीदार टोपी का राजनीतिक खेल
हिन्दुओं में एकजुटता नही होने का ही नतीजा है की आज देश के 13% मुसलमान 80% हिन्दुओं को अपनी टोपी पहनाने पर मजबूर कर दिए है और तर्क यह दी जा रही है कि टोपी पहनने से किसी का धर्म नही बदल जाता है | अगर यही बात हिंदू मुस्लिम समुदाय से कहे कि तिलक लगाने और वंदेमातरम्‌ कहने से भी धर्म नही बदलता है तो क्या मुसलमान भाई माथे पर तिलक लगयेंगे और वंदेमातरम कहेंगे ...?
आज वोट की राजनीति के चलते कुछ दोगले प्रवृति के राजनेता केवल अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए देश को किस दिशा में ले जां रहे है शायद वो समझ नही पा रहे है | आने वाले दिनों में इसके भयंकर परिणाम भी हो सकते है और देश में गृहयुद्ध भी हो सकता है |
इस देश में सदियों से हिंदू और मुसलमान एक साथ रह रहे है लेकिन कुछ स्वार्थी राजनेता उसे बाँटने पर तुले है |
अब समय आ गया है की हिंदू और मुसलमान वक्त कि नज़ाकत को पहचाने और वैसे स्वार्थी तत्वों से दूर् रहे जो हमे बाँटना चाह रहा है ..... क्यों की यह देश हमारा है और इसके भविष्य का निर्माण हम ही कर सकते है |
भारत और पाकिस्तान में समय के हिसाब से दूरियां इतनी बढ़ी की .... जो बात टेबुल से शुरू हुई थी आज वह ताबूत तक पहुँच गई है .... और हम फिर भी इक्षुक है शांतिवार्ता के लिए .....

*** छेत्रिय पार्टियों का हस्र ***
देश की छेत्रिय पार्टियों का जन्म ही हुआ था कांग्रेस के नितियों के विरोध में,
क्यों की कांग्रेस राज्यों के विकास पर ज्यादा ध्यान नहीं देती थी 
इसलिए राज्य की जनता राज्य के कद्दावर नेता पर भरोसा कर उसे जनादेस दिए , 
ये कद्दावर नेता जनता के मत से चुन कर आये और राज्य में अपनी सरकार बनाये, 
खुद की अपनी पार्टियाँ बनाई 
और सत्ता का दुरूपयोग कर बहुत सारे धन कमाएं (कालाधन) 
और यही पर इनसे गलती हुई .... 
कांग्रेस तो चाहती ही थी की इनसे कोई गलती हो | 
आज ज्यादातर छेत्रिय पार्टियों के नेता आय से अधिक संपत्ति के मामले में फंसे हुए है 
और कांग्रेस उनसे हर वो गलत काम करा रही है जो देश हित में नहीं है 
और ये चाह कर भी कांग्रेस का या उसके नितियों का विरोध नहीं कर सकते है 
क्यों की कांग्रेस के पास सीबीआई जैसा मारक छमता का मिसाइल है 
जिसका वह समय समय पर प्रयोग करती रहती है| 
अब ये छेत्रिय पार्टियाँ अपने को जेल जाने बचायेंगे या राज्य के विकाश का कार्य करेगें ... ?
अगले वर्ष चुनाव होने जा रहा है 

"अपने मतों का उपयोग बहुत सोंच समझ कर करें" |