Friday, March 7, 2014

क्या कांग्रेस अपनी चाल में कामयाब हो पायेगी ... ?
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कांग्रेस देश की सत्ता को ज़ोंक की तरह पकड़े हुए है और वह सत्ता से नहीं हटे इसलिए विरोधी पक्षों को परेशान करने के लिए अपना बी टीम भी तैयार कर ली है जिसका नाम है “आम आदमी पार्टी” |
आम आदमी पार्टी का उदय क्यों की विधान सभा चुनाव के कुछ ही दिनों पहले हुआ था और इस पार्टी का जनाधार केवल दिल्ली में था इसलिए यह पार्टी विधानसभा का चुनाव दिल्ली में ही लड़ी, जिसका नतीज़ा हुआ की बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी उभर कर सामने तो आई लेकिन वह अपनी सरकार नहीं बना पाई और 28 सिट जीतने वाली आआपा कांग्रेस के समर्थन से दिल्ली में सरकार बना ली | अब सोंचने वाली बात है की आआपा की सरकार मात्र 49 दिनों तक ही दिल्ली में रही और अरविन्द केजरीवाल ने एक ऐसे मुद्दे पर अपनी सरकार गिरा दी जिसका समर्थन कांग्रेस और बीजेपी दोनों करने का सार्वजानिक बयान दे चुके थे लेकिन अरविन्द केजरीवाल को सरकार गिरानी थी तो गिरा दिए | .... आज दिल्ली की सत्ता गवर्नर के हाथ में है या यह कहा जा सकता है की मात्र 9 सिट जितने वाली कांग्रेस के हाथ में है |
अब लोकसभा का चुनाव सामने है देस की जनता कांग्रेस के कार्यों से खुश नहीं है तथा देश में कांग्रेस की लहर भी समाप्त हो चुकी है ठीक इसके विपरित पुरे देश में बीजेपी के PM उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के पक्ष में हवा चल रही है और लगता है की केंद्र में जो अगली सरकार बनेगी वह बीजेपी की ही होगी और यह बात कांग्रेस को मंजूर नहीं है इसलिए उसने अपनी बी टीम आआपा को नरेंद्र मोदी के पीछे लगा दी है क्यों की कांग्रेस ने अपने स्तर से बहुत कोशिस की थी नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए उनपर बहुत तरह के आरोप भी लगाये 2002 में हुए गुजरात दंगा में इनकी सहभागिता साबित करने की पुरजोर कोशिस की लेकिन सब में मुंह की खानी पड़ी | जब कांग्रेस अपने चालों में कामयाब नहीं हुई तो उसने आआपा को उनके पीछे लगा दी और अरविन्द केजरीवाल आज-कल गुजरात में ही डेरा डंडा डाले हुए है तथा कुछ सवालों का पिटारा बनाये है जो नरेंद्र मोदी से पूछना चाहते है |
अरविन्द केजरीवाल को अब कौन समझाये की जब आप एक राजनैतिक पार्टी बना लिए है तो आप किसी भी पार्टी से या उसके सरकार से सवाल पूछने का हक़ गंवा चुके है आप उसके नीतियों का विरोध कर सकते है क्यों की आप आम जनता नहीं है बल्कि एक राजनैतिक पार्टी के संस्थापक है ... आप अपने पार्टी की नीतियों की चर्चा देश की जनता से कर सकते है | लेकिन आप ऐसा न कर गुजरात सरकार को टारगेट किये है | आपके कुछ सवालों का ज़बाब केंद्र की सरकार बेहतर दे सकती है लेकिन केंद्र से न पूछ कर राज्य सरकार से पूछ रहे है जिसका की वह कोई ज़बाब नहीं दे सकता है |
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अरविन्द केजरीवाल जी देश की जनता अब उतना वेवकूफ नहीं है जितना की आप सोंच और समझ रहे है वह अच्छी तरह जानती है की कौन पार्टी देशहित में सोंचती है और कौन पार्टी सत्ता पाने के लिए सोंचती है |

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